उमंग और उत्साह के रंग में रंगा गुना, तालाबों पर लौटी रौनक
भुजरिया और सिंगवासा तालाबों की लौटी रौनक
गुना। दयालवाणी
रक्षाबंधन के ठीक अगले दिन मनाए जाने वाले पारंपरिक पर्व भुजरिया पर इस बार शहर में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला। गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के गले मिलने और सदभाव का संदेश देने वाले इस पावन पर्व पर शहरवासियों का उत्साह देखते ही बनता था।
इस बार के आयोजन ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया, खासकर शहर के ऐतिहासिक भुजरिया तालाब की रौनक एक बार फिर अपने पूरे परवान पर नजर आई। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार जलाशयों और मेलों में उमड़ी भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि पारंपरिक उत्सवों के प्रति लोगों का प्रेम और क्रेज एक बार फिर तेजी से लौट रहा है। पर्व के उल्लास के बीच शहर में पारंपरिक और भव्य जुलूस निकाला गया। इस दौरान युवाओं ने भुजरिया को सिर पर धारण कर जमकर नृत्य किया। डीजे और ढोल-ढमाकों की थाप पर थिरकते हुए लोग शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जलाशयों तक पहुंचे। विधि-विधान से भुजरिया का विसर्जन करने के बाद सभी ने एक-दूसरे को गले मिलकर बधाइयां दीं और पारंपरिक वाक्यों का उच्चारण कर त्यौहार के आनंद को दोगुना किया।
तालाबों पर सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच सजा मेला
गुना शहर के भुजरिया तालाब, सिंगवासा और गोपालपुरा समेत आसपास के सभी जलाशयों पर महिलाओं की खासी भीड़ उमड़ी। पर्व की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बल हर जगह मुस्तैद नजर आया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। भुजरिया तालाब के बाहर सजे पारंपरिक मेले में लगे रंग-बिरंगे झूले और खान-पान की दुकानों ने बच्चों और बड़ों का मन मोह लिया। श्रावण मास की विदाई के इस खास मौके पर शहर के शिवालयों में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेकर पूरे साल वातावरण में सुख, शांति और धार्मिकता बनाए रखने की प्रार्थना की।