50 साल पुराना रिकॉर्ड लाओ, तभी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र!

अजीब परेशानी से गुजर रहे हैं पालिका बाजार के रहवासी, छूट जाती है बेटियों की पढ़ाई

50 साल पुराना रिकॉर्ड लाओ, तभी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र!
छुट्टी वाले दिन रविवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे रहवासी और एसएफआई कार्यकर्ता।

गुना।दयालवाणी

पढ़ेंगे भी, आगे बढ़ेंगे भी, पर सिस्टम का यह अजीब फरमान कब तक सताएगा  इसी तीखे सवाल और हाथों में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के पोस्टर्स लेकर राघौगढ़ के रहवासी और एसएफआई छात्र संगठन कलेक्ट्रेट जा पहुंचे। यहां गूंजा दर्द सिर्फ कुछ कागजों का नहीं, बल्कि पिछले 8 सालों से सिस्टम की बेरुखी और अधूरे विकास से जूझ रही आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का था।
प्रदर्शन के दौरान सबसे बड़ा और हैरान करने वाला मुद्दा बच्चों के जाति प्रमाण पत्रों का उठा। रहवासियों का आरोप है कि राघौगढ़ नगरपालिका कार्यालय में बच्चों के प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर अजीबोगरीब और असंभव शर्तें थोपी जा रही हैं। अधिकारी आवेदकों से पूरे 50 साल पुराना रिकॉर्ड मांग रहे हैं—वह दस्तावेज जो आज के वक्त में मिलना भूचाल लाने जैसा असंभव है। इस बेतुकी और कागजी कानूनी पेचीदगी के चलते पिछले 8 सालों से परिवार दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर हैं, लेकिन हाथ सिर्फ मायूसियां लगी हैं। कलेक्ट्रेट आए नागरिकों ने बताया कि उनमें से अधिकांश लोग पालिका बाजार में मजदूरी करने के उद्देश्य से रहते हैं। कोई एनएफएल तो कोई गेल में मजदूरी करता है। ऐसे में रिकॉर्ड तलाशना या बनवाना उनके काबू में नहीं है। अगर दो दिन भी मजदूरी नहीं करेंगे तो परिवार का पालन-पोषण नहीं होगा। रहवासियों ने मांग की है कि उनके लिए सरकार को कोई अलग नीति बनाना चाहिए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई सही तरीके से जारी रह सके। क्योंकि अधिकांश लोगों को जाति प्रमाण पत्र पढ़ाई संबंधी कार्यों के लिए चाहिए।

आठवीं के बाद थम जाती हैं बेटियों की उड़ानें
पालिका बाजार क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था के हालात भी सरकार के दावों की पोल खोलते नजर आए। इस इलाके में पढ़ाई की सुविधा सिर्फ कक्षा 8वीं तक ही उपलब्ध है। सवाल यह है कि इसके बाद बच्चों का भविष्य क्या होगा? मजबूरी ऐसी कि आगे की तालीम के लिए या तो गुना जाना पड़ता है या फिर रुठियाई का रुख करना पड़ता है। सफर की लंबी दूरी और सुरक्षा के भारी अभाव के चलते कई मजबूर परिवारों को अपनी बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वानी पड़ रही है।

जर्जर रास्तों का दर्द और 'रपटे पुल' की मांग
गुस्साए लोगों ने रुठियाई से एनएफएल जाने वाले रास्ते की बदहाली का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जिससे रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चों और आम नागरिकों का निकलना दूभर हो गया है। रहवासियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान 'रपटे पुल' का निर्माण है, जिस पर प्रशासन जल्द से जल्द संज्ञान ले। कलेक्ट्रेट पहुंचकर इन पीड़ित परिवारों ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल राहत की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि वर्षों से दोहरी मार झेल रहे इन लोगों की पुकार सुनने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।