आधुनिक दौर में लोक संस्कृति का अनूठा संगम
बंजारा समाज के 'लंहेगी' और 'डांडेयर' उत्सव में नई पीढ़ी को मिला जड़ों से जुड़ने का संदेश
गुना। दयालवाणी
सावन के पवित्र महीने में परंपरा, संस्कृति, रीति-रिवाजों और अटूट एकता का प्रतीक माना जाने वाला बंजारा समाज का पारंपरिक 'लंहेगी' और 'डांडेयर' त्योहार इस बार गुना जिले के बमोरी ब्लॉक स्थित ग्राम चक खड़गपुर में बेहद भव्य और उत्साह के साथ मनाया गया। प्राचीन संस्कृति और आधुनिकता के इस अनूठे संगम में शामिल होने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा कोटा और बीना से भी समाज के सैकड़ों लोग पहुंचे, जिससे पूरे इलाके में एक उल्लासपूर्ण माहौल बन गया। ग्राम खड़गपुर चक के दयाराम बंजारा ने बताया कि इस आयोजन ने समाज के आपसी प्रेम और भाईचारे को और अधिक मजबूत किया है।
गांव के खुले प्रांगण में आयोजित इस उत्सव में पुरुषों ने पारंपरिक सफेद पोशाक और सिर पर रंग-बिरंगी पगड़ी पहनकर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक घेरे में खेले गए डांडिया और लोक नृत्यों ने पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। पारंपरिक लोकगीतों और पारंपरिक देशी वाद्य यंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को पूरी तरह ऊजार्वान बना दिया। दूर-दराज से पधारे समाज के बुजुर्गों ने युवाओं को अपनी मूल जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने की गहरी प्रेरणा दी। इस दौरान आधुनिक युग की नई पीढ़ी यानी आज के युवाओं और बच्चों को यह खास संदेश दिया गया कि वे आधुनिकता को अपनाते हुए भी अपनी प्राचीन लोक संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर सुरक्षित रखें।