गुना जिला अस्पताल बना बदहाली का अखाड़ा
औचक निरीक्षण में गायब मिले डॉक्टर, वार्डों में पसरी गंदगी और लापरवाही
गुना। दयालवाणी
स्थानीय जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर उस समय खुल गई, जब नायब तहसीलदार आरती गौतम द्वारा अस्पताल के चप्पे-चप्पे का औचक निरीक्षण किया गया। इस सघन निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, लापरवाहियों और प्रशासनिक उदासीनता की गंभीर तस्वीरें सामने आईं। अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का हाल बेहद चिंताजनक नजर आया, जिससे आम जनता और उपचार के लिए आने वाले लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि अस्पताल में कई चिकित्सक अपनी ड्यूटी से नदारद और गैरहाजिर मिले। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और शहर से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे कई मरीजों ने सीधे तौर पर नायब तहसीलदार के सामने अपनी पीड़ा बयां की और रोष व्यक्त किया कि घंटों इंतजार करने के बाद भी डॉक्टर अपनी कुर्सियों पर मौजूद नहीं मिले। चिकित्सकों के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही, अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल नजर आई। निरीक्षण के दौरान शौचालयों में सफाई का नामोनिशान नहीं मिला, जिससे वहां भारी गंदगी और बदबू का साम्राज्य पसरा हुआ था। परिसर में जगह-जगह गुटखा की पीक और टूटे-फूटे उपकरण बेतरतीब ढंग से बिखरे पड़े थे, जो अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं। इस प्रकार की चौतरफा गंदगी और कुव्यवस्था के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों पर संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
एसएनसीयू में क्षमता से ज्यादा बच्चे
नायब तहसीलदार ने बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से सबसे अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाने वाले एसएनसीयू वार्ड का भी बारीकी से निरीक्षण किया। वहां की स्थिति और भी भयावह थी, क्योंकि वार्ड में उसकी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक नवजात शिशु भर्ती पाए गए। अधिक भीड़भाड़ और सीमित संसाधनों के चलते बच्चों की उचित देखरेख प्रभावित होने की पूरी आशंका बनी हुई है। इसके अलावा, मेटरनिटी वार्ड का भी जायजा लिया गया और वहां भर्ती जच्चा-बच्चों के लिए मिलने वाली भोजन व्यवस्था की गुणवत्ता की भी जांच की गई, जिसमें कई स्तरों पर खामियां पाई गईं।
अव्यवस्थाएं सुधरने का नहीं ले रही नाम
गौरतलब है कि गुना जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बार यहां की बदहाली पर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के अभाव में हालात जस के तस बने हुए हैं। नायब तहसीलदार आरती गौतम द्वारा इस संपूर्ण औचक निरीक्षण के दौरान पाई गई तमाम लापरवाहियों, गैरहाजिर चिकित्सकों और बदहाल व्यवस्थाओं का एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (उटऌड) को सौंपा जाएगा। माना जा रहा है कि प्रतिवेदन सौंपे जाने के बाद इस गंभीर मामले में कई लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है।