पूर्व सीएमओ के 15 महीने शहर पर पड़े भारी, बर्बाद हुआ शहर

पार्षदों ने चेताया-किया धरा पूर्व सीएमओ का, खामियाजा पूरी पार्टी को भुगतना पड़ सकता है

पूर्व सीएमओ के 15 महीने शहर पर पड़े भारी, बर्बाद हुआ शहर

गुना। दयालवाणी

गुना शहर में विकास के पहिए की रफ्तार को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही घमासान मच गया है। गुना नगरपालिका के पार्षदों ने भाजपा जिला अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह सिकरवार को एक तीखा और पोल खोलने वाला पत्र सौंपकर सनसनी फैला दी है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि पिछले 15 महीनों के दौरान पूर्व प्रभारी सीएमओ और डिप्टी कलेक्टर रहीं मंजूषा खत्री की तानाशाही व मनमानी के चलते शहर का विकास पूरी तरह ठप हो गया है, जिसका खमियाजा अब जनता के बीच जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ रहा है।

पार्षदों ने पत्र में ब्यौरा देते हुए बताया कि परिषद एवं पीआईसी द्वारा करीब एक साल पहले जुलाई-अगस्त 2025 में सभी वार्डों के लगभग 70 विकास कार्यों के लिए 18 करोड़ रुपए की वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी थी, जिसकी राशि आज भी नगरपालिका के पास उपलब्ध है। इसके बावजूद, तत्कालीन प्रभारी सीएमओ ने अध्यक्ष की सहमति के बिना सभी वार्डों के 60 टेंडर निरस्त कर दिए। हालत यह है कि वर्तमान सीएमओ शैलेष अवस्थी के हस्ताक्षर से लगभग 800 से 900 नामांतरण फाइलों में धूल फांक रहे हैं, जबकि नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता की तरफ से एक भी नामांतरण लंबित नहीं है।

बिगड़ती सफाई व्यवस्था और अंधेरे में डूबते वार्ड

आक्रोशित पार्षदों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बीते 15 महीनों से सीएमओ द्वारा शहर के वार्डों में सुबह-दोपहर सफाई व्यवस्था के औचक निरीक्षण तक बंद कर दिए गए थे। नतीजतन, पूरे शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। इसके अलावा, शहर के विभिन्न वार्डों की कम से कम 1200 से 1400 स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं और बंद हैं। मेंटेनेंस का सामान खरीदने के बजाय स्ट्रीट लाइट फिटिंग के टेंडर तीन बार निरस्त कर दिए गए और चौथी बार भी दर स्वीकृति के कायार्देश जारी नहीं किए गए। हद तो तब हो जाती थी जब पार्षदों को अपनी ही नगरपालिका में सीएमओ से मिलने के लिए भी पहले पर्ची लेना पड़ती थी।

ऐतिहासिक जीत के बाद भी विकास की अनदेखी

पत्र में इस बात का खास जिक्र किया गया है कि 25 अगस्त 2022 को इस परिषद के गठन के बाद से अप्रैल 2025 तक भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 38 हजार और लोकसभा चुनाव में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में 56 हजार मतों की रिकॉर्ड लीड हासिल की थी। पहली बार गुना के सभी 37 वार्डों में भाजपा जीती और उपचुनाव में भी कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई। लेकिन अप्रैल 2025 के बाद जब तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर को प्रभार सौंपा गया, तो अधिकारी की मनमानी ने सब कुछ चौपट कर दिया।

संगठन को दी बड़ी चेतावनी

पार्षदों ने जिला अध्यक्ष को स्पष्ट शब्दों में आगाह किया है कि ठीक एक साल बाद फिर से नगरीय निकाय के चुनाव होने हैं। यदि शहर के हालात ऐसे ही रहे, तो पार्टी द्वारा उतारे जाने वाले प्रत्याशियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जनता विकास न होने पर केवल अध्यक्ष को ही नहीं, बल्कि विधायक और सांसद को भी कोसेगी। इसलिए समय रहते इस समस्या का ठोस समाधान निकाला जाए।

पत्र में इनके हस्ताक्षर

इस गंभीर पत्र की प्रतियां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संभाग संगठन प्रभारी डॉ. निशांत खरे को भी भेजी गई हैं। पत्र पर एल्डरमैन वंदना राठौर, कैलाश धाकड़, राजू ओझा, ममता तोमर, फूलबाई रामबली ओझा, सुशीला कुशवाह, नीता शिब्बू कुशवाह, कीर्ति सरवैया, संध्या अशोक सोनी, अनीता कुशवाह, बबीता साहू, विमला साहू, राधा कुशवाह, राजकुमारी, ओमप्रकाश कुशवाह, अरुण सुमन, घासीराम और शील वर्मा सहित कई पार्षदों के हस्ताक्षर शामिल हैं।