दिल्ली के सवर्ण आंदोलन की गुना में भी गूंज
सवर्ण आर्मी का गुना में उग्र प्रदर्शन, हाथों में थे 'शेरों की दहाड़' लिखे बैनर
गुना। दयालवाणी
दिल्ली में जारी सवर्ण समाज के आंदोलन की चिंगारी अब गुना तक पहुंच गई है। इसी कड़ी में सवर्ण आर्मी के बैनर तले समाज के सैकड़ों लोग हनुमान चौराहे पर एकत्र हुए और तीन प्रमुख मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद एक आक्रोशित रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के लोगों में शासन-प्रशासन और राजनीतिक दलों के प्रति खासा आक्रोश नजर आया। समाज के लोगों का स्पष्ट कहना था कि आज उनके पक्ष में खड़े होने वाला एक भी नेता नहीं बचा है। जिन जनप्रतिनिधियों को उन्होंने संसद और विधानसभा तक पहुंचाया, वे आज सवर्णों की आवाज सुनने को तैयार नहीं हैं, जबकि इसके विपरीत दलितों के साथ कोई छोटी सी घटना होने पर सभी राजनीतिक दल और नेता एक सुर में मुखर हो जाते हैं। कलेक्ट्रेट तक निकाली गई इस रैली का माहौल पूरी तरह उग्र और जोश से भरा था। प्रदर्शन में शामिल लोगों के हाथों में 'शेरों की दहाड़' लिखे हुए आकर्षक बैनर भी प्रमुखता से नजर आए। इसके अलावा, रैली में चल रहे लोगों ने कई तरह की तख्तियां थाम रखी थीं, जिन पर 'आरक्षण जाति के आधार पर नहीं गरीबी के आधार पर मिले', 'यूजीसी रोल बैक', 'एससी-एसटी एक्ट में संशोधन' और 'कमल का फूल हमारी भूल' जैसे नारे लिखे हुए थे। इस प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
सवर्ण समाज की तीन प्रमुख मांगें
1. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नियमों को वापस लिया जाए।
2. एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर सवर्णों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी आर्थिक आधार पर आरक्षण का लाभ दिया जाए।
3. एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन किया जाए और कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए मामला झूठा पाए जाने पर शिकायतकर्ता पर 5 लाख रुपये का जुमार्ना लगाया जाए।
केंद्र और राज्य सरकार को जमकर कोसा
इससे पहले हनुमान चौराहे के पास आंदोलन के दौरान सवर्ण आंदोलन के पदाधिकारी और उनसे जुड़े लोगों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए नेताओं ने भाजपा शासित केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार को जमकर कोसा। उनका दावा था कि सवर्ण समाज भाजपा को 90 प्रतिशत तक वोट देता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उनके बच्चों से खिलवाड़ करते हुए यूजीसी जैसा काला कानून ला दिया है। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, बल्कि वे शैक्षणिक संस्थाओं में मानसिक तनाव का भी सामना करेंगे। प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें भाजपा का कोई पदाधिकारी नहीं था। लेकिन कांग्रेस से जुड़े कुछ पूर्व नेताओं ने शिरकत की।
छोटे बच्चे भी हुए शामिल
प्रदर्शन को व्यापक बनाने के लिए सवर्ण आर्मी के पदाधिकारी कुछ छोटे बच्चों को लेकर भी पहुंचे थे। एक बच्चा अपने हाथ में यूजीसी के विरोध में तख्ती लेकर चल रहा था। कलेक्ट्रेट में रैली पहुंचने पर इस बच्चे कोे ज्ञापन देते समय सबसे आगे रखा गया। हालांकि प्रदर्शन से महिलाओं ने दूरी बनाए रखी। लेकिन समाज ने चेतावनी दी कि अगर यूजीसी जैसा कानून वापस नहीं लिया गया सवर्ण आर्मी बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी। जिसका खामियाजा भाजपा को चुनावों में भुगतना होगा।