सीएम युवा अन्नदूत योजना के तहत नहीं हुआ भुगतान, थमे वाहनों के पहिए

जुलाई-अगस्त का भुगतान अटकने और डीजल दर वृद्धि से वाहन संचालक परेशान; 11 सितंबर से बंद किया राशन का उठाव, अक्टूबर से वितरण ठप होने के आसार

सीएम युवा अन्नदूत योजना के तहत नहीं हुआ भुगतान, थमे वाहनों के पहिए

गुना।दयालवाणी

 मध्यप्रदेश में शासकीय उचित मूल्य (कंट्रोल) की दुकानों तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत शासकीय अन्न का परिवहन करने वाले वाहन चालकों और हितग्राहियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों व भुगतान न मिलने के विरोध में काम बंद कर दिया है। बार-बार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर आगाह करने के बावजूद जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो मजबूरन वाहन संचालकों को परिवहन ठप करने जैसा कदम उठाना पड़ा।
जुलाई और अगस्त महीने का भाड़ा न मिलने से उनके सामने डीजल भरवाने और गाड़ियों का मेंटेनेंस कराने तक के लाले पड़ गए हैं। यदि समय रहते इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो गुना जिले सहित पूरे मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली बुरी तरह चरमरा सकती है और गरीबों की थाली तक राशन पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। योजना के हितग्राहियों परिवहनकर्ताओं  ने 31 अगस्त को ही मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉपोर्रेशन के प्रबंधक, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा विभाग के अपर मुख्य सचिव को एक लिखित चेतावनी पत्र सौंपा था। इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि यदि 10 सितंबर तक उनके लंबित बिलों का भुगतान नहीं किया जाता है, तो वे 11 सितंबर से राशन के आवंटन का उठाव पूरी तरह बंद कर देंगे।

डीजल, टायर, बीमा, स्टाफ का खर्च कहां से उठाएंगे?
जमीनी हकीकत यह है कि वाहन संचालकों को जुलाई और अगस्त महीने का परिवहन किराया नहीं मिला है, जिससे उन्हें वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। लगातार डीजल के दाम बढ़ रहे हैं और स्टाफ के वेतन के साथ-साथ वाहनों की मासिक किश्त (एटक), बीमा, नए टायर और रखरखाव का खर्च निकालना उनके लिए असंभव होता जा रहा है। इसी के विरोध में 11 सितंबर से गुना जिले में अन्नदूत योजना के तहत चल रहे राशन परिवहन वाहनों के पहिए थम गए हैं।

डीजल के दाम बढ़े, किराया वहीं का वहीं
वाहन चालकों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि योजना की शुरूआती शर्तों में साफ कहा गया था कि यदि बाजार में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो उसी अनुपात में परिवहन दरों का पुनरीक्षण किया जाएगा। लेकिन डीजल के भाव बढ़ने के बावजूद विभाग आज भी पुरानी और कम दरों पर ही काम करा रहा है, जिससे अन्नदूत योजना के युवाओं को हर महीने भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही, यह पहली बार नहीं है जब राशन परिवहन करने वालों को भुगतान के लिए भटकना पड़ रहा है। इससे पहले साल 2025 में आई भीषण बाढ़ के दौरान भी आपातकालीन परिस्थितियों में अन्नदूतों ने जान जोखिम में डालकर राशन दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाया था। लेकिन उस बाढ़ राहत परिवहन का भुगतान अप्रैल 2026 तक अटका रहा, जिसको लेकर कलेक्टर और शासन स्तर पर कई दौर का पत्राचार करना पड़ा था। लेकिन भुगतान आज तक नहीं हो सका है। बार-बार की इस प्रशासनिक लापरवाही से वाहन चालकों का धैर्य टूट चुका है।

सितंबर का राशन तो बंटेगा, लेकिन अक्टूबर में खड़ी होगी बड़ी मुसीबत
वर्तमान में निर्मित हुए इस गतिरोध का असर तुरंत भले ही न दिखे, लेकिन आने वाले महीने में इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। दरअसल, 31 अगस्त तक राशन का उठाव हो चुका था, जिससे सितंबर महीने में कंट्रोल दुकानों से राशन का वितरण सुचारू रूप से हो जाएगा। लेकिन 11 सितंबर से राशन का उठाव पूरी तरह बंद होने के कारण गोदामों से अनाज दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। यदि वाहन संचालक अपनी मांग पर अड़े रहे और शासन ने उनका बकाया भुगतान जारी नहीं किया, तो अक्टूबर महीने से गुना सहित पूरे मध्यप्रदेश में राशन वितरण व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ जाएगी, जिससे लाखों गरीब परिवार प्रभावित होंगे।