बमोरी मॉडल स्कूल ने कॉन्वेंट स्कूलों को छोड़ा पीछे
प्राचार्य के विजन से बदली तस्वीर
गुना। दयालवाणी
सरकारी स्कूलों की घिसी-पिटे रूढ़ियों को दरकिनार करते हुए गुना जिले का मॉडल स्कूल बमोरी अब निजी कॉन्वेंट स्कूलों के लिए आंख की किरकिरी नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। प्राचार्य श्रीमती पूजा मथुरिया एवं स्टॉप की बदौलत की दूरदर्शी सोच और अटूट संकल्पशक्ति के बूते यह विद्यालय आज सरकारी शिक्षा व्यवस्था की नई इबारत लिख रहा है।
महंगे प्राइवेट स्कूलों में दिखने वाली चमक-धमक और अनुशासन अब इस सरकारी संस्थान की पहचान बन चुकी है। कैंपस में कदम रखते ही अनुशासित माहौल और चुस्त-दुरुस्त व्यवस्थाएं हर आने वाले को हैरान कर देती हैं। यहां के छात्र-छात्राएं न सिर्फ परफेक्ट ड्रेस कोड में नजर आते हैं, बल्कि गले में चमकते आईडी कार्ड के साथ किसी पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों को मात दे रहे हैं। खास बात यह है कि इन आईडी कार्ड्स की व्यवस्था खुद प्राचार्य ने अपने स्तर पर रुचि लेकर की और बच्चों को अपने हाथों से सौंपे। इस एक छोटे से कदम ने बच्चों के भीतर गजब का आत्मविश्वास भर दिया है, जो उनकी आंखों में साफ झलकता है।
पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास पर फोकस
किताबों के रट्टू तोते बनाने के बजाय संस्थान का पूरा फोकस बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर है। अभिभावक अब गर्व से कहते हैं कि जो सुविधाएं कभी भारी-भरकम फीस वसूलने वाले स्कूलों की बपौती हुआ करती थीं, वे आज उनके बच्चों को बमोरी के इस मॉडल स्कूल में बिल्कुल मुफ्त और सहज मिल रही हैं। यह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर नीयत साफ हो और लीडरशिप मजबूत हो, तो सरकारी अमला भी किसी चमत्कार से कम नहीं कर सकता।