पहले ही दिन ध्वस्त हुई डीएपी वितरण व्यवस्था
एमपी स्टेट एग्रो गोदाम पर उमड़ी भीड़, दो दिनों के लिए टोकन हाऊसफुल
गुना।दयालवाणी
जिले में खाद वितरण प्रक्रिया शुरू होते ही व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। स्थानीय एमपी एग्रो गोदाम से जैसे ही डीएपी खाद का वितरण प्रारंभ हुआ, वैसे ही किसानों की लंबी कतारें और प्रशासनिक कुप्रबंधन की तस्वीरें सामने आने लगीं। हालात यह हैं कि आगामी 17 और 18 तारीख तक के टोकन पहले ही पूरी तरह बुक हो चुके हैं, जिससे किसानों में पहले से ही अनिश्चितता का माहौल है। वितरण केंद्र पर उमड़ी भारी भीड़ और संसाधनों के लचर उपयोग के चलते स्थिति पूरी तरह बेकाबू होती नजर आई, जिससे अन्नदाता परेशान हाल दिखाई दिए।
वितरण केंद्र पर पहुंचे किसानों का मुख्य आरोप है कि वे सुबह से ही कतारों में अपनी बारी का इंतजार करने को विवश हैं। कागजी तौर पर गोदाम पर चार कर्मचारियों की तैनाती दर्शाई गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। सारा कामकाज अकेले एक ही कर्मचारी के कंधों पर है, जिससे पूरी प्रक्रिया बेहद धीमी पड़ गई है। किसानों का कहना है कि वे दोपहर 12 बजे से कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सुस्त कार्यशैली के कारण उनका नंबर आने में घंटों का समय लग रहा है।
दो काउंटर और मशीनें होने के बावजूद सिर्फ एक काउंटर से हो रहा वितरण
व्यवस्थाओं की खामियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र पर दो काउंटर और दो वितरण मशीनें उपलब्ध हैं, इसके बावजूद फिलहाल महज एक ही काउंटर से डीएपी खाद बांटी जा रही है। एक काउंटर के भरोसे हजारों किसानों को खाद वितरित करना असंभव साबित हो रहा है। किसानों का आक्रोश तब और फूट पड़ा जब दोपहर के वक्त तैनात कर्मचारी अचानक काउंटर बंद कर पैसे जमा कराने के लिए बैंक चला गया। एक ही कर्मचारी पर नकदी लेने, खाद बांटने और अन्य तमाम कागजी कार्रवाई का दबाव होने के कारण अन्नदाताओं को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
सर्वर डाउन होने का दिया गया हवाला, अधिकारियों ने दी आश्वासन की घुट्टी
इस पूरे अव्यवस्था भरे घटनाक्रम और किसानों के बढ़ते आक्रोश पर जब संबंधित अधिकारियों से पक्ष जाना गया, तो उन्होंने अपनी सफाई में सर्वर डाउन होने का हवाला दिया। अधिकारियों का तर्क है कि सर्वर ठप होने की वजह से ही कर्मचारी को मजबूरी में बैंक पैसे जमा कराने भेजना पड़ा था। हालांकि, अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय यह भरोसा दिलाया है कि केंद्र पर आने वाले हर पात्र किसान को नियमानुसार डीएपी खाद उपलब्ध कराई जाएगी और व्यवस्थाओं में जल्द सुधार किया जाएगा।
दावों और जमीनी हकीकत के बीच पिसता अन्नदाता
इस पूरी घटना ने एक बार फिर कृषि विभाग और खाद वितरण प्रबंधन के दावों की पोल खोल दी है। बुआई के सीजन में जब किसानों को खेतों में होना चाहिए, तब उन्हें खाद के एक-एक कट्टे के लिए केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यदि समय रहते वितरण केंद्रों पर कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई और सभी काउंटरों को सुचारू रूप से चालू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह नाराजगी और अधिक उग्र रूप ले सकती है। प्रशासन को कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर ठोस कदम उठाने होंगे, तभी किसानों को राहत मिल सकेगी।