फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 13 साइबर ठग गिरफ्तार

“नोकिया सिक्योरिटीज” नाम की फर्जी वेबसाइट और ऐप के जरिए शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर करते थे करोड़ों की ठगी

फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 13 साइबर ठग गिरफ्तार

ललितपुर।दयालवाणी

साइबर अपराध थाना ललितपुर पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर शेयर बाजार में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 13 आरोपियों को इंदौर, मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है।

आरोपियों के कब्जे से 7 आईफोन, 16 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 15 कीपैड मोबाइल, 18 डेस्कटॉप कंप्यूटर, एक लैपटॉप, दो जियो वाई-फाई राउटर समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। इसके अलावा ब्रेजा और थार कार भी जब्त की गई हैं।

पुलिस के मुताबिक आरोपी “नोकिया सिक्योरिटीज” नाम की फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को शेयर बाजार में निवेश पर कई गुना मुनाफे का लालच देते थे। फर्जी ऐप पर निवेश की रकम और मुनाफा दिखाकर लोगों को और पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। रकम निकालने पर कर और अन्य शुल्क के नाम पर दोबारा पैसे जमा कराकर ठगी की जाती थी।

जांच में आरोपियों के पास से करीब 6,357 संभावित पीड़ितों का आंकड़ा और लगभग 600 ऐसे बैंक खाते मिले हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम जमा करने के लिए किया जाता था। आरोपियों द्वारा फर्जी सिम, बैंक खातों और डिजिटल मुद्रा के माध्यम से ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था।

ललितपुर में वर्ष 2025 में भी इसी गिरोह द्वारा एक व्यक्ति से 11 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर दूसरे राज्यों में दर्ज मामलों और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की जानकारी जुटा रही है।

अपराध करने का तरीका

आरोपी फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप तैयार कर लोगों को शेयर बाजार में निवेश से अधिक लाभ का लालच देते थे। इसके बाद अलग-अलग नामों से सलाहकार बनकर मोबाइल फोन और संदेश सेवा के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे। फर्जी ऐप पर रकम और मुनाफे का झूठा विवरण दिखाकर विश्वास में लिया जाता था। पैसा निकालने पर कर और अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम जमा कराई जाती थी।

गिरोह के सदस्य अलग-अलग काम संभालते थे। कुछ लोग वेबसाइट और ऐप का तकनीकी संचालन करते थे, कुछ लोगों को फोन करके निवेश के लिए तैयार करते थे, जबकि अन्य सदस्य फर्जी सिम, बैंक खातों और ठगी की रकम के प्रबंधन का काम देखते थे।