मनमानी और धांधली का शिकार हो गया गुना-फतेहगढ़ रोड का निर्माण
स्थानीय विधायक के आरोपों और कलेक्टर के जांच निदेर्शों के बावजूद सुस्त पड़ी है रफ्तार
गुना। दयालवाणी
दो साल पहले जिस सड़क को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए थे और जिसके चौड़ीकरण से राजस्थान सीमा तक सुगम आवागमन की उम्मीद जगी थी, वह मार्ग आज भ्रष्टाचार, अनियमतताओं और प्रशासनिक उपेक्षा की मिसाल बन चुका है। गुना से फतेहगढ़ होते हुए पाड़ोन जाने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग का निर्माण कार्य बीते एक साल से कछुआ गति से जारी है। समय पर काम पूरा न होने और निर्माण में भारी मनमानी के चलते अब यह सड़क यात्रियों के लिए राहत के बजाय आफत बनती जा रही है।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। आरोप है कि निर्माण एजेंसी मनमानी पर आमादा है और नियम-कायदों को ताक पर रखकर काम कराया जा रहा है। सड़क की मजबूती के लिए बेस तैयार करने के बजाय इसमें लगातार काली मिट्टी भरी जा रही है। विशेष रूप से भिंडरा से रंगपुरा, मंगरोड़ा, बेरखेड़ी और चकलौड़ा जैसी लोकेशनों पर व्यापक पैमाने पर घटिया सामग्री और मिट्टी भरने की शिकायतें आ रही हैं। इससे सड़क के भविष्य और उसकी टिकाऊ क्षमता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय विधायक ऋषि अग्रवाल ने भी इस निर्माण कार्य में धांधली और घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर खुलकर अपनी आवाज उठाई थी।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश, फिर भी सुस्त चाल
मीडिया की खबरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गुना कलेक्टर ने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉपोर्रेशन के अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, धरातल पर निर्माण एजेंसी की कार्यशैली में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है, जिससे राहगीर और ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
कोपरा की जगह इस्तेमाल हो रही लाल मुरम
सड़क निर्माण में अनियमितताओं का स्तर इतना बढ़ गया है कि निर्माण एजेंसी सरेआम मनमानी कर रही है। दरअसल, सड़क निर्माण की शर्तों के मुताबिक सड़क का बेस कोपरा से बनना चाहिए। लेकिन फतेहगढ़ मार्ग पर ज्यादातर लाल मुरम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो इसकी सेहत के लिए बिल्कुल सही नहीं है। ऐसी स्थिति में सड़क बनने के बाद जल्द ही दोबारा जर्जर हो जाएगी और शासन के करोड़ों रुपए उसी मिट्टी में मिल जाएंगे।
सैकड़ों गांवों का संपर्क बाधित, राजस्थान से जुड़ता है मार्ग
यह सड़क केवल दो शहरों को जोड़ने वाला जरिया भर नहीं है, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण अंचलों की जीवनरेखा है। इसके साथ ही, राजस्थान से गुना जिले को जोड़ने के कारण इस मार्ग पर चौबीसों घंटे छोटे, मध्यम और भारी वाहनों का भारी दबाव रहता है। इसके बावजूद इसके निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी से न केवल क्षेत्रीय ग्रामीण परेशान हैं, बल्कि अंतरराज्यीय परिवहन भी लगातार प्रभावित हो रहा है।
दो साल पहले जगी थी विकास की आस: तब क्या थे हालात?
यदि दो वर्ष पुराने घटनाक्रम पर नजर डालें, तो बमोरी इलाके में स्थित इस गुना-फतेहगढ़ मार्ग के दिन बदलने की उम्मीद जगी थी। तब 5.5 मीटर चौड़ी इस सड़क को 10 मीटर चौड़ा कर डबल लेन बनाने और दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ मीटर के शोल्डर तैयार करने की योजना को मंजूरी मिली थी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से केंद्र सरकार ने इस चौड़ीकरण योजना को स्वीकृति दी थी। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान की ओर से आने-जाने वाले बड़े वाहनों के कारण लगने वाले जाम से मुक्ति दिलाना था। साथ ही, चंदेरी जाने वाले पर्यटकों और गुना स्थित श्रीराम टेकरी पर स्थापित होने वाली प्रभु श्री राम की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा के दर्शन हेतु आने वाले धार्मिक श्रद्धालुओं को भी सुगम मार्ग उपलब्ध कराना था।
आस अधूरी, जनता पूछ रही सवाल
हवाई अड्डे के लिए बजट और कृषि महाविद्यालय जैसी सौगातों के बीच इस सड़क को जिले के विकास का मुख्य आधार माना गया था। लेकिन दो साल बाद आज स्थिति यह है कि कागजों पर मंजूर हुई योजना धरातल पर ठेकेदारों की लापरवाही और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की जांच के बाद इस मार्ग का भाग्य बदलता है या फिर सैकड़ों गांवों के लोग इसी तरह धूल और गड्ढों के बीच सफर करने को मजबूर रहेंगे।