गुना गड्ढों वाला शहर है, यहां संभलकर चलिए
पूरे शहर में सड़कों की हालत हुई खस्ता, जगह-जगह गड्ढों ने बढ़ाई राहगीरों की मुसीबत
गुना। दयालवाणी
बारिश का सीजन अभी खत्म भी नहीं हुआ है कि गुना शहर में सड़कों की हालत बद से बदत्तर हो चुकी है। हालांकि समस्या नई नहीं है, बल्कि जबसे सीवर लाइन परियोजना का काम पूरा है, तबसे सड़कें मरम्मत की बांट जोह रही हैं। हालत यह है कि लोग सोशल मीडिया पर गुना के गड्ढों को लेकर मीम बनाने लगे हैं कि यह गुलाब, गुनिया नहीं बल्कि गड्ढों का शहर है।
दरअसल, गुना में लगभग 5 सालों तक सीवर परियोजना का काम जारी रहा। इस दौरान संबंधित कंपनी ने पूरे शहर की सड़कें खोद डालीं। इनमें कुछ तो रिपेयर कर दीं, लेकिन अधिकांश को अभी भी वैसे ही छोड़ दिया गया है। जिन सड़कों को सीवर लाइन बिछाने के लिए खोद गया था, उनमें अब गड्ढे ही गड्ढे नजर आ रहे हैं। नौबत यह हो गई है कि शहर के सबसे व्यस्ततम क्षेत्र हनुमान चौराहे पर भी इन दिनों कई बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। यह वह स्पॉट है, जहां से रोजाना सैकड़ों गाड़ियां गुजरती हैं। ऐसे में दुर्घटना की आशंका से इंकार कतई नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा गलियों की बात ही अलग है। यहां तक समझ नहीं आता है कि सड़कें थी भी या सिर्फ लाल मुरम बिछा दी गई है। गुना की सड़कों की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कुछ इक्का-दुक्का क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश जगह गड्ढे ही नजर आ रहे हैं।
अध्यक्ष पत्र लिखकर परेशान, सीएमओ को चिंता ही नहीं
खास बात यह है कि शहर की सड़कों का मेंटीनेंस देखने की जिम्मेदारी संभालने वाली नगरीय निकाय के अधिकारियों का रवैया समझ से परे है। दरअसल, साल 2022 में हुए नगरीय निकाय चुनाव के कुछ महीनों या कहें कि दो सालों तक सबकुछ ठीक चला। लेकिन इसके बाद नगरपालिका में कलेक्टर प्रभारी सीएमओ तैनात कर दीं। इसके बाद से ढर्रा ऐसा बिगड़ा है कि न तो नगरीय क्षेत्र की सड़कों को मरम्मत किया जा रहा है और न ही नए निर्माण हो रहे हैं। बीते दिनों नगरपालिका के पार्षदों ने भी सत्ताधारी दल भाजपा के जिला अध्यक्ष को बताया कि उनके वार्डों में टेंडर स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरु नहीं हो पाने की वजह से जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि इसी तरह का पत्र नगरपालिका अध्यक्ष भी वरिष्ठ अधिकारियों को लिख चुके हैं कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरु कराए जाएं। लेकिन ऐसा लगता है कि नगरपालिका का हाल इतना बुरा हो चुका है कि अध्यक्ष बेबस नजर आ रही हैं और अधिकारी ध्यान ही नहीं दे रहे हैं।
बारिश के बाद होगा और बुरा हाल
एक तरफ गुना के प्रमुख क्षेत्रों में सड़कों पर गड्ढे राहगीरों की मुसीबत बन चुके हैं तो वहीं अब बारिश का सीजन ढलान पर है। बारिश के दौरान मुरम वाली सड़कों का हाल भी बुरा हो चुका है। ऐसे में फिलहाल आवागमन कम रहता है। लेकिन जैसे ही बारिश खत्म होगी, उसके बाद सड़कों की दुर्दशा होना तय है। रहवासियों को चिंता इस बात की है कि अगर मरम्मत जल्द नहीं हुई या नई सड़कें नहीं बनाई गई तो पहले से ही बेहाल हो चुकी गुना शहर की आवागमन व्यवस्था और खस्ता हो सकता है।
नगर सरकार के इंतजार के बिना जागरूक नागरिकों ने खुद भरा मलबा
शहर में बीते दो दिनों से हुई मूसलाधार बारिश के चलते कई प्रमुख सड़कों पर बने छोटे-छोटे गड्ढों ने विकराल रूप ले लिया है। बारिश के कारण शहर के अतिव्यस्त जयस्तंभ चौराहे के समीप देखते ही देखते एक गड्ढा इतना गहरा हो गया कि वह वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित होने लगा था। इस गड्ढे के कारण राहगीरों और वाहन चालकों के फिसलने तथा गाड़ियां फंसने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ती जा रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों के एक जागरूक समूह ने नगर पालिका और प्रशासन का इंतजार करने के बजाय स्वयं ही पहल करने का निर्णय लिया। गड्ढे के कारण किसी बड़े हादसे या जानमाल के नुकसान की आशंका को खत्म करने के लिए मयंक शर्मा, सतीश शिवहरे, सचिन शर्मा, जितेंद्र शर्मा, अमित तिवारी सहित अन्य स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर गड्ढे को भरने की योजना बनाई। नागरिकों ने आपसी सहयोग से मलबे की तीन ट्रॉली-ठेले मंगवाए और पूरे गड्ढे में मलबा डालकर उसे समतल कर दिया, ताकि वहां से गुजरने वाले वाहन चालक किसी बड़े हादसे का शिकार होने से बच सकें। नागरिकों की इस मानवीय और सराहनीय पहल की पूरे शहर में जमकर तारीफ की जा रही है, वहीं लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश के मौसम को देखते हुए शहर की अन्य जर्जर सड़कों के जानलेवा गड्ढों की भी तत्काल मरम्मत कराई जाए।