मैदान में उतरा अमला तो फिर थोक में मिल रही अमानक पॉलीथिन
कैंट से लेकर नानाखेड़ी तक चला नपा का चाबुक, मदन डेयरी, महेश डेयरी, मां दुर्गा एंटरप्राइजेज और जैन श्री रेस्टोरेंट पर लगा हजारों का जुर्माना
गुना। दयालवाणी
शहर में लंबे अरसे के बाद जब नगर पालिका का अमला नींद से जागा और धरातल पर उतरा, तो बाजारों में प्रतिबंधित अमानक पॉलिथीन थोक के भाव मिलती नजर आई। पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर बन चुकी अमानक पॉलिथीन के खिलाफ नगर पालिका ने दो दिनों में ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई करते हुए आधा क्विंटल से अधिक पॉलिथीन जब्त की है।
नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता के निर्देश एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी शैलेश अवस्थी के आदेश पर स्वच्छता निरीक्षक विवेक श्रीवास्तव और उनकी टीम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई को अंजाम दिया। अशोकनगर रोड कैंट क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान टीम ने मदन डेयरी एवं महेश डेयरी एंड स्वीट्स पर शिकंजा कसा। यहाँ से लगभग 5,500 रुपये मूल्य की 25 किलो 500 ग्राम अमानक पॉलिथीन जब्त की गई। साथ ही दोनों दुकानदारों पर 3,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इस कार्रवाई में शोभित जादौन, राजेश माझी, आदित्य सिंह बघेल एवं अशफाक खान मौजूद रहे। इससे पहले बीते साल भी नगरपालिका की टीम ने कई बार कार्रवाई करते हुए अमानक पॉलीथिन का जखीरा जब्त किया था। लेकिन समझाइश के बावजूद दुकानदार इसका उपयोग बंद नहीं कर रहे हैं। खास बात यह है कि कार्रवाई की खबर सुनते ही बाजार में दुकानदार सतर्क तो हो जाते हैं, लेकिन पॉलीथिन बदस्तूर बिकती और इस्तेमाल होती रहती है।
नानाखेड़ी और ऊमरी रोड पर दूसरी स्ट्राइक
अगले ही दिन अमले ने कृषि उपज मंडी नानाखेड़ी और ऊमरी रोड क्षेत्र की दुकानों का औचक निरीक्षण किया। यहाँ मां दुर्गा एंटरप्राइजेज और जैन श्री रेस्टोरेंट से करीब 6,000 रुपये कीमत की 27 किलो 500 ग्राम प्रतिबंधित पॉलिथीन जब्त की गई और दुकानदारों पर 4,000 रुपये का जुमार्ना ठोका गया। इस दौरान टीम में वीरू खटीक भी शामिल रहे।
क्यों खतरनाक है अमानक पॉलिथीन?
अमानक पॉलिथीन न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि इंसान और मवेशियों की सेहत के लिए भी बेहद घातक है। यह पॉलिथीन सैकड़ों सालों तक नष्ट नहीं होती, जिससे नालियाँ जाम हो जाती हैं और भूमि की उर्वरता खत्म होती है। कचरे के ढेर में पॉलिथीन खाने से बेजुवान मवेशियों की आंतें बंद हो जाती हैं और उनकी अकाल मृत्यु हो जाती है। पतली और अमानक पॉलिथीन में गर्म खाद्य पदार्थ रखने से हानिकारक रसायन भोजन में घुल जाते हैं, जो आगे चलकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं। नगर पालिका ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में दुकानदार अमानक पॉलिथीन का उपयोग करते पाए गए, तो इससे भी अधिक भारी-भरकम राशि का जुमार्ना और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सस्ती होने से बढ़ता प्रयोग
बाजार में अमानक (प्रतिबंधित) पॉलिथीन की कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किग्रा है, जबकि पर्यावरण-अनुकूल बायोडिग्रेडेबल थैलियां 250 से 350 रुपये प्रति किग्रा तक मिलती हैं। इसी लागत अंतर के कारण व्यापारी और दुकानदार पर्यावरण तथा स्वास्थ्य के खतरों को नजरअंदाज कर अमानक पॉलिथीन का उपयोग करते हैं। पेट्रोलियम-आधारित अमानक पॉलिथीन 400 से 500 वर्षों तक नष्ट नहीं होती। यह नाले-नालियां जाम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता खत्म करती है और बेजुबान मवेशियों की मौत का कारण बनती है। इसमें गर्म खाद्य सामग्री रखने पर कैंसरकारी रसायन भोजन में मिलते हैं, जिससे यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। दूसरी ओर, मकई के स्टार्च और प्राकृतिक घटकों से बनी बायोडिग्रेडेबल थैलियां 3 से 6 महीने में मिट्टी या कंपोस्ट में पूरी तरह गलकर खाद में बदल जाती हैं। यह मवेशियों और खाद्य पदार्थों के लिए पूर्णत: सुरक्षित एवं केमिकल-मुक्त होती हैं, जिसके उपयोग को शासन द्वारा निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।