गो आधारित खेती और नशामुक्ति के क्षेत्र में 20 वर्षों से जुटे भगत सिंह धाकड़ सम्मानित

गो आधारित प्राकृतिक खेती, देसी गोपालन और युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयासों को मिला सम्मान — जिला स्तरीय बलराम महोत्सव में प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित

गो आधारित खेती और नशामुक्ति के क्षेत्र में 20 वर्षों से जुटे भगत सिंह धाकड़ सम्मानित

गुना। दयालवाणी

गो आधारित प्राकृतिक खेती, देसी गोपालन, गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए लंबे समय से कार्य कर रहे आदर्श ग्राम भुलॉंय निवासी भगत सिंह धाकड़ को सम्मानित किया गया। जिला स्तरीय बलराम महोत्सव के दौरान उन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोह का प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान जिलाधीश किशोर कुमार कन्याल, गुना विधायक पन्नालाल शाक्य और चाचौड़ा विधायक श्रीमती प्रियंका मीणा द्वारा प्रदान किया गया।

भगत सिंह धाकड़ पिछले करीब 20 वर्षों से गांव और क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनका मुख्य फोकस गो आधारित प्राकृतिक खेती, देसी नस्ल की गायों का संरक्षण एवं पालन, गौशाला को आत्मनिर्भर बनाना और किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना रहा है।

किसानों को गो आधारित खेती से जोड़ने का प्रयास

भगत सिंह धाकड़ का मानना है कि किसान खेती में रासायनिक साधनों पर निर्भरता कम करके देशी गाय के गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करें तो खेती की लागत कम करने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को भी बेहतर किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से उनके गांव में किसानों के लिए लगातार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।

गो आधारित प्राकृतिक खेती के मॉडल को देखने और समझने के लिए राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक भी ग्राम भुलॉंय पहुंच चुके हैं। यहां किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक एवं गो आधारित खेती की तकनीकों को समझा।

गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम

भगत सिंह धाकड़ पिछले कई वर्षों से देसी गोपालन और गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों में भी जुटे हैं। उनका प्रयास रहा है कि गौशाला केवल संरक्षण का केंद्र न रहकर प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़े। इसके लिए उनकी टीम लगातार विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जागरूक करती रही है।

युवाओं को नशे से दूर रखने का अभियान

गो आधारित खेती और गोपालन के साथ भगत सिंह धाकड़ की टीम सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय है। युवाओं को नशे से दूर रखने और गांव एवं क्षेत्र को नशामुक्त बनाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। टीम द्वारा युवाओं और ग्रामीणों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देने के साथ स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

सम्मान को बताया पूरी टीम की मेहनत

सम्मान मिलने के बाद भगत सिंह धाकड़ ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न बताते हुए पूरी टीम की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब दो दशकों से गांव और क्षेत्र के विकास के लिए साथियों के साथ मिलकर लगातार काम किया जा रहा है। गो आधारित प्राकृतिक खेती, देसी गोपालन, गौशाला को स्वावलंबी बनाने और नशामुक्ति के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रशस्ति पत्र मिलना पूरी टीम के लिए उत्साह बढ़ाने वाला क्षण है। इससे गांव के विकास और समाजहित से जुड़े कार्यों को और गति देने की प्रेरणा मिलेगी।

ग्रामीण विकास की दिशा में मिसाल

भगत सिंह धाकड़ के प्रयासों को ग्रामीण क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, गोपालन और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक संसाधनों से खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

बलराम महोत्सव के मंच से मिला यह सम्मान भगत सिंह धाकड़ और उनकी टीम के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनके कार्यों का दायरा केवल खेती और गोपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ग्राम विकास और सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ा हुआ है।