करोड़ों खर्च करके बनाए अमृत स्टेशन में भ्रमण कर रहे मवेशी
अमृत भारत योजना के तहत आधुनिक हो रहे गुना रेलवे स्टेशन पर आवारा पशुओं का जमावड़ा, यात्री सुरक्षा और स्वच्छता के दावों की खुली पोल
गुना।दयालवाणी
एक तरफ जहां गुना रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करोड़ों रुपयों की लागत से संवारने और आधुनिक सुविधाएं देने का काम चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्टेशन परिसर में पसरी अव्यवस्था यात्रियों के लिए भारी मुसीबत बनी हुई है। स्टेशन पर सांड, आवारा मवेशी, सूअर और कुत्तों की लगातार मौजूदगी के कारण यात्रियों की सुरक्षा और जान-माल का खतरा हर समय बना रहता है। हालात यह हैं कि प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों को हर पल यह डर सताता रहता है कि कहीं कोई आवारा पशु अचानक उन पर हमला न कर दे।
स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देर रात प्लेटफॉर्म पर जब यात्री ट्रेनों की प्रतीक्षा करते हैं, उस दौरान आवारा सांड बेरोकटोक घूमते दिखाई देते हैं। हाल ही में सामने आई एक घटना में प्लेटफॉर्म पर घूम रहे सांड ने डस्टबिन को पलट दिया और उसमें भरा पूरा कचरा परिसर में फैला दिया। यदि वही आवारा मवेशी किसी बच्चे, महिला या बुजुर्ग यात्री को टक्कर मार देता, तो गंभीर हादसा हो सकता था। इस प्रकार की घटनाओं से यात्रियों में भय का माहौल बना हुआ है।
बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए बना जान का जोखिम
रेलवे प्रशासन यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा देने का दावा करता है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। स्टेशन परिसर में आवारा पशुओं के इस तरह खुलेआम घूमने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को हो रही है। सामान उठाकर चल रहे यात्रियों के सामने अचानक आवारा कुत्ते या सांड आ जाने से भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है। यात्रियों का कहना है कि क्या अब रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के साथ-साथ खुद की सुरक्षा के लिए लाठी-डंडे लेकर चलना पड़ेगा?
पूर्व में उठ चुका है मुद्दा
स्टेशन परिसर में आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकने और यात्रियों के साथ होने वाली हाथापाई की घटनाओं को लेकर पूर्व में जेडआरयूसीसी (रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति) सदस्य सुनील आचार्य द्वारा संबंधित रेल अधिकारियों को अवगत कराया गया था। उस समय अधिकारियों ने स्टेशन के दोनों छोर पर जाली लगाने और काऊ कैटल की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
लापरवाही पर उठ रहे गंभीर सवाल
रेल प्रशासन द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद वर्षों बाद भी सुरक्षात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए? जब पूरे स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, तो स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों पर आवारा पशुओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं? नगर और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले हजारों यात्री रोजाना इस स्टेशन का उपयोग करते हैं। ऐसे में रेल प्रशासन की यह उदासीनता किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करती दिखाई दे रही है। यात्रियों ने मांग की है कि वरिष्ठ रेल अधिकारी तुरंत इस समस्या का संज्ञान लें, स्टेशन के दोनों छोर पर सुरक्षा जाली लगवाएं और आवारा पशुओं की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाएं, ताकि यात्रियों को भयमुक्त वातावरण में यात्रा करने की सुविधा मिल सके।